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Friday, July 2, 2010

Risthey

कुछ रिश्ते तोडे टूट ते नहीं
कुछ धागे कमज़ोर ही सही बन्द्ये रहते हैं
कुछ यादें आँखों से ओझल ही सही
पलकों में सदा क्यों बसे रहते हैं ?





कुछ वादे रिश्ते सदा निभाते हैं
कुछ रिश्तो से निभाए गए वादों से हम अचंबित रहते हैं
कुछ वादे  निभाने वाले भूल जाते अपनों को
कुछ निभाए वादों से रिश्ते बन जाते हैं

कुछ रिश्तो के एहसास हर पल खास हैं
कुछ रिश्तो से हमेशा होती एक आस हैं
कुछ रिश्ते नाम के होकर रह जाते हैं
लेकिन कुछ रिश्तो की मौजूदगी जैसे धुप में बरसात होती हैं

कुछ जुडे तार अनकही रिस्तो से होते हैं
किसी के दोस्ती तले छुपी कोई और बात होती हैं
कुछ रिश्तो को समज ने में अरसा लग जाता हैं
कुछ रिश्तो को जान ने से भी पहले  एक अटूट विश्वास होता हैं

कुछ रिश्तो की यादो में एक मीठी सी महक होती हैं
कुछ रिश्तो में सिमटी कुछ खुशियाँ खास होती हैं
कुछ लोग भुलाने की बातें करते हैं
पर कैसे कोई कहे  उन  रिस्तो की महक से यह ज़िन्दगी कितनी हसीं होती हैं

इन रिश्तो की तजुर्बे से आगे बदना सिखा हैं हमने
इन रिश्तो के पेचीदे रास्तो में चलना सिखा हैं हमने
उनका एहसास बचपन से अब तक करते हैं हम
क्योंकी इन रिश्तो से ही जीना सिखा हैं हमने और तुमने!

- किरण हेगड़े